कटनी। शहर की सबसे बड़ी समस्या—भारी जाम और वाहनों की अव्यवस्था—को दूर करने के लिए वर्ष 1982-23में शुरू की गई ट्रांसपोर्ट नगर योजना आज भी कागजों पर ही सिमटी हुई है। चार दशक बीत जाने के बावजूद योजना को जमीन पर उतारने में प्रशासन की बार-बार की नाकामी और उदासीनता ने शहरवासियों को लगातार परेशान किया है। अब नगर निगम ने पुरैनी स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में लीज पर आवंटित प्लॉटों पर कारोबार न करने वाले 48 ट्रांसपोर्टरों को लीज निरस्तीकरण का नोटिस थमा दिया है, जिससे विभागीय महकमों में हड़कंप मचा हुआ है।
यह योजना शहर से बाहर पुरैनी में ट्रांसपोर्ट नगरी बसाकर शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। 1982-23 में आधारशिला रखी गई, लेकिन दशकों तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। वर्ष 2012 में लॉटरी के माध्यम से 266 प्लॉटों को 30 वर्षीय लीज पर आवंटित किया गया। कारोबारियों को 30 वर्ष की लीज पर भूखंड दिए गए, जिसमें निर्माण कार्य एक वर्ष के भीतर पूरा करने की शर्त थी। लेकिन अधिकांश कारोबारियों ने निर्माण नहीं किया और शहर में ही ट्रांसपोर्ट व्यवसाय चलाते रहे, जिससे शहर की जाम समस्या और बदतर होती गई।
नगर निगम ने अब सख्त रुख अपनाते हुए 20 फरवरी को 48 प्रमुख ट्रांसपोर्टरों को नोटिस जारी किया है। इनमें एक्सप्रेस ट्रांसपोर्ट (नितिन बर्मा), उपकार ट्रांसपोर्ट (इशित्याक अहमद), भाटिया रोड लाइंस (अजीत सिंह), न्यू गुरुनानक ट्रांसपोर्ट (अजीत सिंह), पटेल ट्रांसपोर्ट (रामखिलावन), राहत ट्रांसपोर्ट (आकाश रावत), राहुल ट्रांसपोर्ट (श्याम सिंह), गुड़गांव ट्रांसपोर्ट (दिलीप रोहड़ा), बंग रोड लाइंस (गोपाल मोहेधरी), जालपा ट्रांसपोर्ट (रामखिलावन गर्ग), सिर्फ ट्रांसपोर्ट, चौरसिया रोडवेज, गीता रोडवेज, आनंद एंड कंपनी और कटनी पब्लिक ट्रांसपोर्ट आदि शामिल हैं।
नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि आवंटन के एक वर्ष के भीतर निर्माण पूर्ण न करने पर लीज निरस्त की जा सकती है। यदि निर्धारित समय में निर्माण नहीं होता, तो बिना मुवायना दिए भूखंड वापस ले लिया जाएगा। नगर निगम ने 15 दिनों का समय दिया है, अन्यथा कार्रवाई शुरू हो जाएगी। राजस्व अधिकारी जागेश्वर पाठक ने बताया कि यदि कारोबारी जवाब नहीं देते या निर्माण नहीं करते, तो लीज निरस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
यह कार्रवाई प्रशासन की पुरानी नाकामी को उजागर करती है। योजना के 43 वर्ष बाद भी ट्रांसपोर्ट नगर पूरी तरह विकसित नहीं हो सका। 102 कारोबारियों ने रजिस्ट्री कराई, लेकिन ज्यादातर ने शहर में ही व्यवसाय जारी रखा। इससे शहर की सड़कें ट्रकों-ट्रेलरों से जाम रहती हैं, प्रदूषण बढ़ता है और आम नागरिकों को रोजाना जाम, दुर्घटना और असुविधा का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन की इस लंबी खामोशी और ढिलाई ने शहर को भारी नुकसान पहुंचाया है। अब जब नोटिस जारी हो गए हैं, तो सवाल उठता है—क्या यह महज दिखावा है या वाकई योजना को गति मिलेगी? शहरवासियों की उम्मीद है कि इस बार प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझेगा और ट्रांसपोर्ट नगर को वास्तविक रूप से विकसित कर शहर को जाम से मुक्ति दिलाएगा। अन्यथा, यह एक और उदाहरण बनेगा प्रशासनिक नाकामी का, जहां अच्छी योजनाएं कागजों पर ही दम तोड़ती हैं।
