मध्य प्रदेश की सरकार के संरक्षण में चल रहे भ्रष्टाचार के घोटालों का एक और काला पन्ना सामने आ गया है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) के उच्च अधिकारियों ने ठेकेदार पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड के साथ साठगांठ करके अनुबंध के साफ उल्लंघन के बावजूद 39.60 करोड़ रुपये का अवैध भुगतान कर दिया। यह खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट में हुआ है, जो राज्य सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के नाम पर हो रही लूट को बेनकाब करता है।
स्लीमनाबाद तहसील, कटनी जिले में बरगी नहर का निर्माण कार्य 2008 से चल रहा है, लेकिन आज 18 साल बाद भी यह परियोजना अधर में लटकी हुई है। 12 किलोमीटर लंबी, 10 मीटर व्यास वाली इस सुरंग का उद्देश्य नर्मदा नदी के बरगी बांध से पानी को स्थानांतरित करना है, जो लाखों किसानों और ग्रामीणों की सिंचाई का आधार है। लेकिन एनवीडीए के अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को ‘व्हाइट इलिफेंट’ बना दिया। हाल ही में दावा किया गया था कि अप्रैल तक कार्य पूरा हो जाएगा, लेकिन सीएजी रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति थी।
रिपोर्ट के अनुसार, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में खुद साफ था कि खुदाई और बोरिंग स्थल पर उच्च जल स्तर होने से डीवाटरिंग (पानी निकासी) ठेकेदार का दायित्व है। अनुबंध की धारा स्पष्ट रूप से कहती है कि अप्रत्याशित परिस्थितियों (जैसे प्राकृतिक आपदा) में केवल समय विस्तार दिया जा सकता है, न कि कोई आर्थिक मुआवजा। नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (एनआईटी) में भी डीवाटरिंग को ठेकेदार की जिम्मेदारी बताया गया था। फिर भी, एनवीडीए के जबलपुर चीफ इंजीनियर सहित वरिष्ठ अफसरों ने फरवरी 2023 में 257वीं बैठक में ‘अप्रत्याशित परिस्थितियों’ के नाम पर अतिरिक्त 20.81 करोड़ रुपये का अनुमोदन कर दिया। इसके बाद 338वें आरए बिल के जरिए कुल 39.60 करोड़ रुपये का भुगतान कर डाला गया। यह न केवल अनुबंध का घोर उल्लंघन है, बल्कि सरकारी खजाने की लूट का जीता-जागता प्रमाण है।
एनवीडीए के अधिकारियों और ठेकेदार के बीच की यह मिलीभगत इतनी गहरी है कि सीएजी ने इसे ‘साठगांठ का स्पष्ट मामला’ करार दिया है। क्या यह संयोग है कि ठेकेदार पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को बार-बार फायदा पहुंचाया जा रहा है? राज्य सरकार के वित्त सदस्यों और टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। फरवरी 2025 में एनवीडीए ने खुद एक आंतरिक जांच में सफाई दी थी कि ‘कार्य क्षेत्र टेंडर में परिभाषित था और भुगतान उचित था’, लेकिन सीएजी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह झूठी दलीलें हैं।
इस घोटाले का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है। नर्मदा घाटी के लाखों किसान वर्षों से सूखे की मार झेल रहे हैं, जबकि सरकारी अफसरों के ‘अप्रत्याशित’ फायदे के नाम पर करोड़ों की लूट हो रही है। क्या शिवराज सरकार इस ‘नर्मदा लूट’ को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी? या यह भी पिछले घोटालों की तरह दब जाएगी? विपक्षी दलों ने पहले ही हंगामा शुरू कर दिया है, और जनता में आक्रोश फैल रहा है। एनवीडीए मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन की तैयारी हो रही है।
सीएजी रिपोर्ट के बाद राज्य स्तर पर हड़कंप मच गया है। उम्मीद है कि सरकार अब सोए हुए अफसरों पर शिकंजा कसेगी, वरना यह भ्रष्टाचार का चक्र और तेज होगा। मध्य प्रदेश के विकास के नाम पर हो रही यह लूट कब रुकेगी? यह सवाल हर नागरिक के मन में कौंध रहा है।By- हरी शंकर पराशर
