“हाई अलर्ट 85 मार्ग बंद” मलबे में दबी कार, खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं अलकनंदा-मंदाकिनी

रुद्रप्रयाग। प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा और आगामी मौसम चेतावनियों के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन से बात की। उन्होंने विभिन्न जिलों की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। सीएम ने सभी आपदा प्रबंधन व राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एजेंसियों को पूरी सतर्कता से कार्य करने को कहा। संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी का निर्देश दिया। नदी-नालों के जलस्तर पर सतत दृष्टि रखने को भी कहा गया। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अलर्ट जारी किया है। गुरुवार के लिए देहरादून, चमोली और बागेश्वर जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। राज्य के शेष जनपदों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर तेज वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की संभावना जताई है। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र प्रदेशभर की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।

प्रदेश में भूस्खलन के चलते 85 मार्ग बंद है। इसमें अल्मोड़ा दो, बागेश्वर 10, चमोली 20, देहरादून सात, नैनीताल में आठ मार्ग बंद है। पौड़ी पांच, पिथौरागढ़ 13, रुद्रप्रयाग छह, टिहरी आठ और उत्तरकाशी में छह मार्ग बंद है। लगातार बारिश के बीच बृहस्पतिवार सुबह विजयनगर-तैला मोटर मार्ग एक बार फिर भूस्खलन की चपेट में आ गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से मार्ग पर यातायात बाधित हो गया है। विजयनगर-तैला मोटर मार्ग 80 से अधिक गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग है। मानसून के दौरान इस मार्ग का शुरुआती हिस्सा लगातार भूस्खलन और भूधंसाव से प्रभावित हो रहा है, जिससे सड़क बार-बार बंद हो रही है। रुद्रप्रयाग जिले में बुधवार रात से जारी बारिश के बाद अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह अलकनंदा का जलस्तर 627.80 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 627.00 मीटर है। वहीं मंदाकिनी का जलस्तर 626.60 मीटर रहा, जबकि इसका खतरे का निशान 626.00 मीटर है। पिछले 24 घंटे में ऊखीमठ में 53.30 मिमी, जखोली में 59.00 मिमी और रुद्रप्रयाग में 16.00 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नगर पालिका और नगर पंचायतों की ओर से लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को नदी तटों से दूर रहने और अनावश्यक रूप से नदी के समीप नहीं जाने की अपील की जा रही है।  यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड के समीप बुधवार को बड़ा हादसा होने से बच गया। यमुनोत्री धाम से लौट रहे उत्तर प्रदेश के दो कांवड़ यात्री अचानक पहाड़ी से गिरे चट्टानी मलबे और पत्थरों की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। जान बचाने के लिए दोनों यात्रियों को अपनी बाइक मौके पर छोड़कर भागना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ देर तक भूस्खलन जारी रहने के बाद स्थिति सामान्य हुई जिसके बाद सिलाई बैंड से यमुनोत्री की ओर फंसे लोग सावधानी के साथ बड़कोट की ओर रवाना हुए। सामाजिक कार्यकर्ता महावीर पंवार ने बताया कि सिलाई बैंड सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर लाइट की व्यवस्था करनी चाहिए। इधर एनएच के ईई मनोज रावत ने बताया कि संभवत: जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के बीच संवेदनशील प्वाइंटों पर लाइटों को लेकर बातचीत चल रही है। 

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