“800 विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरें में” राम भरोसे मैकूलाल महाविद्यालय की सोसाइटी का पंजीकरण निरस्त

लखनऊ। राजधानी के तेलीबाग स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध राम भरोसे मैकूलाल महाविद्यालय की सोसाइटी का पंजीकरण फर्म्स सोसाइटीज व चिट्स के डिप्टी रजिस्ट्रार ने निरस्त कर दिया है। ऐसे में यहां बीए व बीकॉम में पढ़ने वाले 800 विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का संकट हो सकता है। बीते 25 जुलाई को डिप्टी रजिस्ट्रार की ओर से पारित आदेश के तहत यह कार्रवाई हुई है। महाविद्यालय की संस्था का पंजीकरण प्रमाणपत्र संख्या LUC/05725/2018-19 और नवीनीकरण प्रमाणपत्र भी तत्काल प्रभाव से रद्द किए गए हैं। आरोप है कि जिस जमीन पर निजी महाविद्यालय बना गया है वह इंटर कॉलेज की है जिसका पट्टा प्रबंधक ने खुद से खुद को ही कर दिया। नियमानुसार इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक से अनुमति ली जानी चाहिए थी। रजिस्ट्रार ने यह कार्रवाई सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 की धारा 12-डी के तहत की है। अमर उजाला ने बीते दिनों इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

इन तीन कारणों से निरस्त हुई है सोसाइटी
आदेश में पंजीकरण निरस्त करने के तीन मुख्य आधार बताए गए हैं। इनमें संस्था का भ्रामक नाम, लोकनीति के खिलाफ कार्य तथा प्रबंधक की ओर से सोसाइटी रजिस्ट्रार को गुमराह कर पंजीकरण पाना प्रमुख आधार हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि वर्ष 1959 में राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत करीब 21.125 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की थी। यह भूमि मूल संस्था राम भरोसे मैकूलाल हायर सेकेंडरी स्कूल के लिए थी। इस संबंध में प्रबंधक को डिप्टी रजिस्ट्रार ने छह बार कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। सुनवाई के अवसर भी दिए गए थे। इसके बावजूद प्रबंधक की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। आदेश के खिलाफ मंडलायुक्त के यहां एक माह के भीतर अपील की जा सकती है। यह प्रावधान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 12-डी (2) के तहत है। प्रबंधक श्रीकांत साहू का कहना है कि महाविद्यालय बंद नहीं होने दिया जाएगा। मैं न्यायालय में गुहार लगाऊंगा। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि पूर्व प्रधानाचार्य इस समय सरकार से जुड़े हैं और वही सब करवा रहे हैं। लविवि के रजिस्ट्रार भावना मिश्रा का कहना है कि संस्था का पंजीकरण निरस्त हुआ है तो यह गंभीर मामला है। अभी हमारे पास आदेश की कॉपी नहीं आई है। कॉपी मिल जाए उसके बाद विश्वविद्यालय आवश्यक कदम उठाएगा।

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