“मंगोलपुरी अग्निकांड में 4 की मौत” कोई बच्चों की पढ़ाई, तो कोई पत्नी के इलाज के लिए कर रहा था ओवरटाइम काम
1 min read
दिल्ली। मंगोलपुरी स्थित जूता फैक्टरी में शुक्रवार रात लगी आग ने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। मृतक अपने-अपने परिवार की खातिर कुछ और पैसा के लिए ओवरटाइम के लिए रूक गए थे। ओवरटाइम में काम करने करने के दौरान फैक्टरी में आग लग गई। सभी पिछले कई वर्षों से फैक्ट्ररी में काम कर रहे थे। किसी ने बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए अतिरिक्त काम करने का फैसला किया था तो कोई पत्नी के इलाज के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि शुक्रवार की रात उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी।
मृतकों के घरों में बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य आने वाले त्योहारों की तैयारियों में जुटे थे। मृतकों में उत्तर प्रदेश के हरदोई, देवरिया और बिहार के मधुबनी और नालंदा के रहने वाले कर्मचारी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के हरदोई निवासी हरीहर पिछले 25 वर्षों से दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में रह रहे थे। वह पत्नी और तीन बच्चों के साथ यहां रहते थे। मंगोलपुरी स्थित जूता फैक्टरी में काम करते हुए उन्हें 24 साल से अधिक का समय हो गया था। वह केवल फैक्टरी में काम ही नहीं करते थे, बल्कि पैकिंग यूनिट में मजदूरों की कमी होने पर अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालते थे। रोज की तरह शुक्रवार को भी वह फैक्टरी पहुंचे थे।
बच्चों की पढ़ाई और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए वह अक्सर अतिरिक्त काम करते थे। शुक्रवार रात भी उन्होंने कुछ रुपये अधिक कमाने के लिए ओवरटाइम करने का फैसला किया, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह फैसला उनकी जिंदगी का आखिरी फैसला साबित होगा। हादसे में हरीहर की मौत के बाद पत्नी और तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार के सामने अब बच्चों की परवरिश और उनके भविष्य को संवारने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। मृतक प्रेम चंद्र के बेटे रमेश ने बताया कि उनके पिता ही परिवार में अकेले कमाने वाले थे। उनकी मां पिछले एक साल से कैंसर से पीड़ित हैं। मां की देखभाल और इलाज के लिए रमेश को अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद से प्रेम चंद्र ही परिवार का खर्च उठाने के साथ पत्नी के इलाज के लिए पैसे जुटा रहे थे। रमेश के मना करने के बावजूद प्रेम चंद्र पत्नी के इलाज के लिए लगातार काम कर रहे थे। अधिक पैसे कमाने की उम्मीद में वह शुक्रवार रात डबल शिफ्ट में काम कर रहे थे। इसी दौरान फैक्टरी में लगी आग ने उनकी जिंदगी छीन ली। पिता की मौत के बाद अब रमेश के सामने बीमार मां की देखभाल के साथ पूरे परिवार को संभालने की जिम्मेदारी आ गई है।
बिहार के नालंदा निवासी अशोक कुमार बचपन से ही दिल्ली में रहकर काम कर रहे थे। करीब पांच साल पहले उनकी शादी हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें एक चार साल और दूसरी दो साल की है। अभी उनकी पत्नी गर्भवती है। बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य देने के लिए वह दिल्ली की जूता फैक्ट्ररी में मेहनत कर रहे थे। अशोक की मौत से उनकी दोनों बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि हादसे के समय अशोक अपने परिवार से फोन पर बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पत्नी को फैक्टरी में आग लगने की जानकारी दी और फोन काट दिया। इसके बाद जब परिवार ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो उनका फोन बंद आने लगा। कुछ देर बाद परिवार को उनकी मौत की खबर मिली। मृतक लाल बाबू चौहान उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले थे। वह पिछले करीब 15 वर्षों से जूता फैक्टरी में काम कर रहे थे। परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं। शनिवार सुबह परिवार को उनकी मौत की सूचना मिली। परिजनों के रविवार सुबह तक दिल्ली पहुंचने की संभावना है। लाल बाबू की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी और दो बच्चों के सामने अब जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाने की चुनौती है।
