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आठ रुपये में कैसे मिटेगा कुपोषण ? MP में 8 साल से नहीं बढ़ी आंगनबाड़ी पोषण दर, 33% बच्चे अभी भी कम वजन के शिकार

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मध्य प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ जंग जारी है, लेकिन राज्य की आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को मिलने वाले पूरक पोषण आहार (SNP) की दरें पिछले आठ वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं। सामान्य बच्चों को प्रतिदिन मात्र 8 रुपये और अति गंभीर कुपोषित बच्चों को 12 रुपये ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इतनी कम राशि में पौष्टिक भोजन कैसे मिलेगा, यह सवाल विधानसभा से लेकर सड़क तक गूंज रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार, प्रदेश में 35.7% बच्चे ठिगनेपन (स्टंटिंग), 33% कम वजन (अंडरवेट) और 19% दुबलेपन (वेस्टिंग) की चपेट में हैं। हाल के पोषण ट्रैकर और सरकारी आंकड़ों में कुछ सुधार दिख रहा है, लेकिन आदिवासी बहुल जिलों में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

विधानसभा में उठा मुद्दा, सरकार ने ठुकराया प्रस्ताव
चुरहट विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने विधानसभा में सवाल उठाया था कि पिछले दस वर्षों में आंगनबाड़ी में पोषण आहार की दर में कोई बढ़ोतरी क्यों नहीं हुई? क्या सरकार इसे कम से कम दोगुना करने पर विचार करेगी?
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया: “पूरक पोषण आहार की दर का निर्धारण भारत सरकार द्वारा किया जाता है। वर्ष 2017 में आखिरी बार वृद्धि हुई थी। राज्य स्तर पर इस राशि को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।”

विपक्ष का आरोप है कि महंगाई के इस दौर में 8 रुपये में मुश्किल से एक मुट्ठी दाल-चावल या थोड़ा दूध मिल पाता है, जबकि गौशालाओं में गायों के चारे पर प्रतिदिन 40 रुपये खर्च हो रहे हैं। हाल की रिपोर्ट्स में इसकी तुलना कर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए गए हैं।
कुपोषण के आंकड़े: सुधार धीमा, चुनौतियां बड़ी
ठिगनापन (Stunting): 35.7% (NFHS-5)
कम वजन (Underweight): 33%
दुबलापन (Wasting): 19%

NFHS-4 से तुलना में ठिगनेपन में 1.6%, कम वजन में 2.3% और दुबलेपन में 2.6% की कमी आई है, लेकिन राष्ट्रीय औसत से प्रदेश अभी पीछे है। Poshan Abhiyaan और Saksham Anganwadi & Poshan 2.0 के तहत प्रयास जारी हैं। केंद्र ने 2023 में पोषण मानकों को अपडेट किया, जिसमें डाइट डाइवर्सिटी, प्रोटीन और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर फोकस है। मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य 2030 तक कुपोषण मुक्त राज्य बनाना है, और हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तीन साल में कुपोषण समाप्त करने की ‘फुल-प्रूफ’ योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

केंद्र से दर बढ़ाने की मांग तेज
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2024 में दरें बढ़ाकर सामान्य बच्चों के लिए 18 रुपये तक करने की बात कही थी, लेकिन मध्य प्रदेश में अभी भी पुरानी दरें लागू हैं। विपक्ष और विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पर्याप्त फंडिंग के लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है।
कांग्रेस नेता हेमंत कटारे ने कहा, “बच्चों पर 8-12 रुपये और गायों पर 40 रुपये—यह प्राथमिकताओं का आईना है। कुपोषण सिर्फ भोजन की कमी नहीं, गरीबी, शिक्षा और स्वच्छता से जुड़ी समस्या है।”

प्रदेश में कुपोषण का हाल
संकेतक
NFHS-5 (%)
NFHS-4 से बदलाव
ठिगनापन (Stunting)
35.7
-1.6%
कम वजन (Underweight)
33.0
-2.3%
दुबलापन (Wasting)
19.0
-2.6%
कुपोषण मिटाने के लिए समग्र प्रयास जरूरी हैं—बढ़ती दरें, बेहतर मॉनिटरिंग, स्व-सहायता समूहों की भागीदारी और जागरूकता। आठ रुपये में दूर होने वाला कुपोषण नहीं, बल्कि ठोस नीतियां और संसाधन ही मासूमों का भविष्य संवार सकते हैं। By- हरी शंकर पराशर

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