“राम मंदिर चंदे पर डाका” 11 माह में 83 करोड़ का दान: सुरक्षा पर 10 करोड़ खर्च, फिर भी चोरी

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दान राशि में गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की चर्चा तेज होती जा रही है। जांच के तीसरे दिन एसआईटी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उसकी पड़ताल केवल धनराशि के कथित गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक, प्रबंधकीय और निगरानी तंत्र की गहन समीक्षा की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनकी अब तक सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं हुई थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एसआईटी अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि आखिर ऐसी परिस्थितियां कैसे बनीं, जिनमें अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। हालांकि वे चौंकाने वाले तथ्य क्या हैं, ये अब तक पता नहीं चल सके हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी दान संग्रह, धनराशि की गणना, रख-रखाव, निगरानी और रिपोर्टिंग से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। एसआईटी की जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जवाबदेही तय करना माना जा रहा है। जांच की दिशा से यह साफ है कि एसआईटी अब केवल यह नहीं पूछ रही कि किसने किया, बल्कि उससे बड़ा सवाल तलाश रही है-यह संभव कैसे हुआ। यही सवाल आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले खुलासों का आधार बन सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नियमितताओं के पीछे किसी व्यक्ति विशेष की भूमिका अधिक थी या फिर व्यवस्थागत कमजोरियों ने इस स्थिति को जन्म दिया। इसी कारण पूरी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को जांच के दायरे में रखा गया है।

राम मंदिर की दानराशि गड़बड़ी प्रकरण की जांच के बीच ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों से कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के अनुसार मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर 11 माह में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसी अवधि में दान पेटियों से चोरी और दानराशि में गड़बड़ी का मामला सामने आ गया। जानकारी के अनुसार, 21 मार्च को हुई ट्रस्ट की बैठक में एक अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक की आय-व्यय का ब्योरा प्रस्तुत किया गया था। इसी विवरण में सुरक्षा मद पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। मंदिर परिसर में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के बावजूद दान पेटियों से कथित धन और आभूषणों की चोरी का मामला सामने आने के बाद अब सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 11 माह के दौरान ट्रस्ट को विभिन्न माध्यमों से लगभग 83 करोड़ दान में मिले। इसमें पेटियों से 55 करोड़, काउंटरों से 18 करोड़, ऑनलाइन 8 करोड़, विदेशी श्रद्धालुओं से 78 लाख व अन्य स्रोतों से 1.22 लाख प्राप्त हुए। दान की राशि गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। प्रदेश के कई पूर्व डीजीपी का कहना है कि ये गंभीर आपराधिक कृत्य है। इसमें तत्काल केस दर्ज करना चाहिए। यही मांग आज देश की जनता भी कर रही है। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा, रोजाना लाखों- करोड़ों का दान आता है। बताया जाता है कि सोना-चांदी, रत्न व हीरे जड़े आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। ये सामान्य अपराध नहीं है बल्कि महापाप है।

मंदिर संचालन और दान प्रबंधन में जिस दक्षता व पारदर्शिता की आवश्यकता थी, वह दिखाई नहीं देती। एसआईटी का गठन किया गया है। इस मामले में अपराध पंजीकृत किया जाना चाहिए। मेरी राय में जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। करीब 300-400 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मंदिर निर्माण हुआ है। ऐसे ऐतिहासिक व पवित्र स्थल में यदि सेंधमारी या वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों की पहचान कर उन्हें ऐसा दंड दिया जाना चाहिए, जो नजीर बने। पूर्व डीजीपी एके जैन ने कहा कि दान राशि के गबन का जो मामला सामने आया है, वह एक आपराधिक घटना है। इसमें केस दर्ज होना चाहिए। जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मंदिर प्रशासन के साथ पुलिस व अन्य एजेंसियों की बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई जाए। इस प्रकरण से छवि प्रभावित हुई है, इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। केस दर्ज कर विवेचना के लिए मुख्यालय स्तर से आईपीएस और एएसपी अधिकारियों वाली एसआईटी गठित करने की जानी चाहिए। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले में उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होनी है। याचिका में मामले की CBI से जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAJ) से लेखा परीक्षा कराने का भी आग्रह किया गया है।

यह जनहित याचिका बीते शुक्रवार को उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में दाखिल हुई थी। यह याचिका 18 जून की वाद सूची में क्रमांक 466 पर सूचीबद्ध है। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ इसकी सुनवाई करेगी। श्रीराम मंदिर की दान की राशि में हेरफेर के मामले में SIT (विशेष जांच दल) की तफ्तीश तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रही। जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे आशंका है कि सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई थी ताकि रकम पार कर सुबूत मिटाए जा सकें। हालांकि, अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, निगरानी करने वाले असल जिम्मेदार एसआईटी के सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। जांच टीम ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ की है। एसआईटी की टीम सोमवार से अयोध्या में डेरा डाले है। पहले दिन करीब साढ़े सात घंटे और मंगलवार को 11 घंटे मंदिर परिसर में रहकर टीम ने जांच की थी। बुधवार को भी जांच का सिलसिला जारी रहा। सुबह करीब दस बजे एसआईटी की टीम मंदिर परिसर पहुंची। जहां ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत अन्य कई पदाधिकारी, कर्मचारी, पुजारी और बैंक कर्मी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने सीसीटीवी कैमरों की स्थिति को गहनता से परखा। इसमें कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जिससे आशंका है कि चोरी करने वालों ने फुटेज से छेड़छाड़ की है। 

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