जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं सोलर प्लांट लगाने पर मिलेगी पांच फीसदी सब्सिडी: सीएम सुक्खू
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा युवाओं की कमाई का नया जरिया बनेगी। राज्य सरकार ने निजी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान देने का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चुराह के देहग्रां में सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के दौरान इस योजना की जानकारी दी। सीएम सुक्खू ने कहा कि 680 करोड़ रुपये की राजीव गांधी स्टार्टअप स्वरोजगार सौर ऊर्जा योजना के तहत निजी भूमि पर 100 किलोवाट से दो मेगावाट तक के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा सकते हैं। इसके लिए जनजातीय क्षेत्रों में पांच प्रतिशत और गैर जनजातीय क्षेत्रों में चार प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 250 किलोवाट से एक मेगावाट तक का सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए यदि कोई व्यक्ति बैंक से ऋण लेता है तो उस पर लगने वाले नौ प्रतिशत ब्याज में से पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी सरकार देगी। होम स्टे स्थापित करने, उनके विस्तार और उन्नयन के लिए पांच करोड़ रुपये तक के निवेश पर पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा रहा है।
इससे चुराह और भरमौर जैसे पर्यटन संभावनाओं वाले क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को अपनी आय बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर लोकतंत्र और संविधान के नाम पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। चंबा के लिल्ह में वीरवार को जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सांसद अनुराग ठाकुर और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले वोटों की चोरी कर सत्ता हासिल की और बाद में धनबल के सहारे कांग्रेस विधायकों को अपने पाले में किया। जनादेश का सम्मान नहीं करने वाली भाजपा अब लोकतंत्र की बात कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में मुगलों, राजाओं और अंग्रेजों के शासन के दौरान आम जनता को सरकार चुनने का अधिकार नहीं था। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान और देश की आजादी के बाद ही लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हुई। आज जनता अपने वोट से पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर मुख्यमंत्री तक का चुनाव करती है। उन्होंने इस व्यवस्था का श्रेय कांग्रेस की विचारधारा को दिया और भाजपा की पदयात्राओं पर भी सवाल उठाए। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से 2022 के बीच प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सातवें स्थान पर पहुंच गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के प्रयासों से हिमाचल पांचवें स्थान पर आया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल कर उन्हें बुढ़ापे का सहारा दिया है। वहीं भरमौर विधानसभा क्षेत्र की गैर जनजातीय दर्जे वाली 27 पंचायतों को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए कमेटी गठित करने और मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया है। इन पंचायतों की करीब 44 हजार आबादी लंबे समय से जनजातीय दर्जे की मांग उठा रही है। स्थानीय निवासी कमल ठाकुर, राजीव कुमार, नरेश कुमार, रविंद्र कुमार का कहना है कि उनकी भाषा, संस्कृति, खानपान और रहन-सहन भरमौर के जनजातीय क्षेत्र से मेल खाते हैं, लेकिन प्रशासनिक तौर पर उन्हें गैर जनजातीय क्षेत्र में रखा गया है। लोगों का तर्क है कि वे भरमौर विधानसभा क्षेत्र में मतदान करते हैं, लेकिन जनजातीय क्षेत्र को मिलने वाली सुविधाओं और अधिकारों से वंचित हैं। इसे क्षेत्र के साथ भेदभाव के रूप में देखा जा रहा है। जनजातीय दर्जे की मांग करने वाली पंचायतों में गुराड़, डुलाड़ा, किलोड़, कलमला, कुनेड़, राड़ी, भटवाड़ा, प्रीणा, गाण, बलोठ, खुंदले, लेच, कूंर, छतराड़ी, प्यूहरा, गैहरा, ब्रेही, सुनारा, तागी, लोथल, बकाण, धिमला, बंदला, फागड़ी, दाड़वी, मैहला और चड़ी शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों के करीब 95 प्रतिशत गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। जिला मार्केट कमेटी के चेयरमैन ललित ठाकुर ने मुख्यमंत्री की लिल्ह में आयोजित जनसभा में इस मांग को उठाया। मुख्यमंत्री की ओर से कमेटी गठित करने के आश्वासन के बाद क्षेत्रवासियों को मांग पूरी होने की उम्मीद बंधी है।
