लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में किसी बड़े जिम्मेदार पर अब तक कानूनी शिकंजा नहीं कसा है। सिर्फ महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे हुए हैं। एसआईटी ने अनिल मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अंदेशा था कि उनको आरोपी बनाया जाएगा लेकिन अब तक उनको बचा लिया गया है। एफआईआर में नाम फिलहाल नहीं जोड़ा गया है। इस्तीफा ही उन पर असल कार्रवाई मानी जा रही है। सिफारिश का असर दिखाई दे रहा है। अब देखना होगा कि विवेचना पूरी होने तक नाम जोड़ा जाता है या नहीं। चढ़ावा चोरी प्रकरण की एफआईआर 25 जून को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में दर्ज की थी। पुलिस ने आठ आरोपियों को जेल भेजा था। इसमें चंपत राय का करीबी टिन्नू यादव, गणना इंचार्ज सुभाष व गणनाकर्मी अनुकल्प, लवकुश, मनीष, अविनाश, करुणेश, रमाशंकर शामिल थे।
एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा था कि बैंक के साथ हुए एमओयू में अनिल मिश्रा के ही हस्ताक्षर थे। चढ़ावा राशि की गणना में उनकी प्रमुख भूमिका थी। सीधे तौर पर एसआईटी ने उनको दोषी ठहराया था, यहां तक कि ये भी लिखा था कि अनिल मिश्रा ने एमओयू की शर्तों में अनिल मिश्रा ने बदलाव किया था। इसलिए पुलिस की विवेचना में उनका नाम शामिल किए जाने की तैयारी थी। मगर इस्तीफा देने के बाद अनिल मिश्रा मंदिर से पूरी तरह से खुद को अलग कर लिया है। जिससे कानूनी जांच की आंच से वह बच सकें। सूत्र बताते हैं कि काफी शीर्ष स्तर से उन्होंने पैरवी भी कराई है। वहां पर सफाई दी है कि उनकी संलिप्तता नहीं है। हालांकि नियमों में ढील देना और निगरानी में लापरवाही बरतने के पीछे साजिश का भी सवाल उठता है। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में चल रही जांच में अनिल मिश्रा का नाम शामिल किए जाने की संभावना न के बराबर है।
