पीलीभीत। स्कूल संचालक महेंद्रपाल की मौत के बाद तीनों बच्चे अनाथ हो गए। अपनी सगी मां को बचपन में ही खो दिया। पिता ने दूसरी शादी की, लेकिन इन बच्चों को दूसरी मां का साथ भी अधिक दिनों तक नहीं मिल सका। अब पिता का भी साया सिर से उठ गया। तीनों बच्चों की परवरिश को लेकर परिजनों में चिंता है। हंसता-खेलता परिवार ऐसे मोड़ पर आ गया, जहां दुखों के सिवा कुछ नहीं रह गया। महेंद्रपाल की जिंदगी में दुखों का सिलसिला काफी पुराना है। ग्रामीणों के मुताबिक, महेंद्रपाल को अपनी जिंदगी को संवारने और बच्चों की परवरिश के लिए दो शादियां करनी पड़ीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पहली शादी बहेड़ी निवासी सरला देवी से हुई थी। करीब आठ वर्ष पूर्व सरला देवी की बीमारी से मृत्यु हो गई। उनसे चार बच्चे पुत्री प्रभा (17), सुधा (16) और दो जुड़वां पुत्र राम और लखन (8 वर्ष) हुए। लखन की लगभग एक वर्ष पूर्व मृत्यु हो गई।
पहली पत्नी की मौत के बाद बच्चों की देखभाल और अकेलेपन को दूर करने के लिए महेंद्रपाल ने करीब छह साल पहले छिनकी (बहेड़ी) की रहने वाली रिंकी से दूसरी शादी की, लेकिन दुखों ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा। करीब तीन साल पहले रिंकी की भी मौत हो गई। दोनों माताओं को खोने के बाद तीनों बच्चे अपने पिता महेंद्रपाल के सहारे रह रहे थे। बड़ी बहनें मिलकर छोटे भाई राम को संभालती रहीं हैं। चार दिन पहले धान का बीज लेने की बात कहकर निकले महेंद्रपाल के वापस लौटने की बच्चे प्रतीक्षा करते रह गए। बृहस्पतिवार को जैसे ही महेंद्रपाल का शव मिलने की सूचना गांव पहुंची तो तीनों बदहवास हो गए। पिता की मौत ने इन मासूमों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। बेटियों की शादी और बेटे की परवरिश कैसे होगी? परिजनों को यही चिंता सता रही है। ग्रामीणों में चर्चा है कि जब महेंद्र पाल का बेटा लखन बीमार हुआ तो इलाज के लिए वह ऋषिकेश ले गए। वहां के अस्पताल में इलाज के दौरान बरेली की एक महिला से उनकी जान पहचान हो गई। वह महिला भी अस्पताल में अपने एक परिजन का इलाज करा रही थी।
बताते हैं कि दोनों में प्रेम प्रसंग हो गया था। बाद में वह महिला कई बार गांव आई और हंगामा किया। उस महिला को लेकर महेंद्र पाल अक्सर परेशान हो जाता था। दो-दो माताओं को खोने के बाद तीनों बच्चे अपने पिता महेंद्रपाल के सहारे जी रहे थे। बच्चों को उम्मीद थी कि पिता कमाकर लौटेंगे और उनका घर फिर से सामान्य होगा। लेकिन गुरुवार को जैसे ही महेंद्रपाल का शव मिलने की खबर गांव पहुंची, तीनों बच्चों के पैरों तले जमीन खिसक गई। घर में अब केवल रोने-बिलखने की आवाजें आ रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 17 साल की प्रभा, 16 साल की सुधा और महज 8 साल के मासूम राम का पालन-पोषण अब किसके सहारे होगा? पिता की मौत ने इन मासूमों के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। बेटियों की शादी और बेटे की परवरिश आखिर कैसे होगी। एसपी सुकीर्ति माधव मिश्रा ने बताया कि घटनाक्रम के खुलासे के लिए टीम को लगाया गया है।
