जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। अशोक गहलोत ने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार तानाशाही की राह पर चल रही है और उसे यह समझ लेना चाहिए कि लाठियों के बल पर न तो सच को दबाया जा सकता है और न ही न्याय की मांग करने वाली आवाज़ों को हमेशा के लिए शांत किया जा सकता है। गहलोत ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में युवाओं की नाराजगी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उनके अनुसार, एक समय बड़ी संख्या में युवाओं ने भारतीय जनता पार्टी के प्रचार और वादों पर भरोसा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन अब वही युवा अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे युवाओं की आवाज़ को बलपूर्वक कुचलना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार का दायित्व है कि वह संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकाले, न कि बल प्रयोग का सहारा ले। गहलोत ने अपने संदेश में संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान और पंडित जवाहरलाल नेहरू के लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर चलता है। उन्होंने कहा कि देश को लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप ही संचालित किया जाना चाहिए, न कि तानाशाही तरीके से।
