गोंडा। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के परिवार के दबाव में कुछ महिला पहलवान उनके खिलाफ बोलने को तैयार हुईं। सोमवार को विश्नोहरपुर स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व सांसद ने कहा कि हरियाणा में कई कुश्ती अकादमियां हैं, लेकिन महादेव रेसलिंग एकेडमी एक परिवार से जुड़ी है। इसे स्थापित करने में भूपेंद्र हुड्डा की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि अदालत का एक परिवार, एक अखाड़ा संबंधी निष्कर्ष उनके नहीं, बल्कि दो पीड़ित लड़कियों के बयान पर आधारित है। उन्होंने खुशी जताई कि अदालत के फैसले से उनकी बातें सच साबित हुई हैं। पूर्व सांसद ने पहलवानों के बयानों में विरोधाभास का दावा करते हुए कहा कि निगरानी समिति, शपथ पत्र और अदालत में दिए गए बयानों में काफी अंतर है।
हिसार और रोहतक के पहलवानों ने बजरंग पूनिया का पता दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन घटनाओं का आरोप लगा, उस समय वह पहलवानों के साथ मौजूद नहीं थे। इस साजिश में 42 लोग शामिल थे और कुछ उद्योगपतियों ने पैसा लगाया था। मीडिया में बिना स्वतंत्र पुष्टि के उन्हें दुष्कर्म का आरोपी बताया गया। उन्होंने बताया कि जूनियर पहलवानों के हित में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ट्रायल जैसी व्यवस्थाओं के नियमों में बदलाव किए गए थे। कुछ कथित रूप से नामी पहलवान बिना प्रक्रिया से गुजरे सीधे बड़े मुकाबलों में जाना चाहते थे। इसलिए इस बदलाव का विरोध राजनीतिक हो गया। बाद में आंदोलन कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी का खिलौना बन गया। इससे खेल व्यवस्था के साथ-साथ महिला खिलाड़ियों को नुकसान हुआ। विधानसभा चुनाव पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अपनी कोई ताकत नहीं है। वह गठबंधन होने पर समाजवादी पार्टी के सहारे चुनाव लड़ सकती है।
